शादी का बोझ!

सामने वाली बर्थ पर एक नव विवाहित दंपति है। लड़की की उम्र पूछी नही पर अठारह से ज़्यादा नही हो सकती, कम ही होगी। लड़का भी कोई ज़्यादा उम्र का नही है पर पहली बार अपनी पत्नी और माँ को ले कर शहर जा रहे है। लड़की के हाथ में महेंदी का रंग अभी सुर्ख़ है। पूरे हाथ चूड़ी से भरे हुए है। पैर में आलता भारी पायल और बड़ी बड़ी बिछिया। देवरिया के किसी गाँव के होगे, वही के छोटे स्टेशन पर चढ़े थे।

लड़की बहुत ही कमज़ोर है। शादी में दी हुई भारी साड़ी पहने है। लड़का कैज्यूअल में टीशर्ट और हाफ़ पैंट पहने है। मोटी मोटी तली हुई दाल पिठ्ठा रूखी खा कर जूस से गटक रहे है! पहले सिर्फ़ बेटा और माँ ने खाया और लड़की बैठी देखती रही। सास ने बहु को अपने बग़ल में बैठा रखा है। बेटा दूसरी तरफ़! सास के बाल बिलकुल काले है और उम्र चालीस भी नही होगी

फिर एक बिरयानी रायता ख़रीदा और माँ बेटा ने खाया और बहु देखती रही। जब दोनों छक गए तो लड़का ख़ाली बर्तन धोने चला गया। बहु फिर दोनों के बचे हुए को बहुत धीरे धीरे खाने लगी।

खाना खा कर लड़की बीच की बर्थ पर सोने चली गई। लड़के ने उसकी साड़ी को समेट पर उसपर चादर डाला। फिर नीचे सो रही माँ के साथ वही रिपीट किया।

छोटी सी बच्ची सी लड़की बड़ी ख़ुश है। शायद घर से कॉल है जो शर्मा कर मुस्कुरा रही है लगातार। जैसा उसका सारा अस्तित्व इस शादी से जुड़ा है। सर पर हमेशा टीके साड़ी की तरह वो जाने कितना बोझ लिए भविष्य की कल्पनाओं में खोई है और लड़का वो शायद जैसे पहले था आज भी उसी स्वच्छंदता से जी रहा है।

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