बंदरिया आर्मी
देवबंध और बंदरिया आर्मी
आज हम बालासुंदरी देवी मंदिर के तालाब के प्रांगण में नारी अदालत, देवबंध में बस कुछ देर पहले बैठे थे की अचानक एक बंदरिया ज़िलाधिकारी के बग़ल में बैठ गई। जब वो पास आ रहा था तब नारी अदालत की अध्यक्ष ने सबसे कहा की अपनी चप्पल अपने नीचे कर ले ये चप्पल उठा ले जाते है। हम जल्दी से अपना समान समेटने लगे और बंदरिया आराम से बैठ कर हमें देखने लगी। उसे देखते ही सामने बैठी एक कार्यकर्ता ने जिलाधिकारी से कहा, दीदी देखो कितने अच्छे से बैठी है नारी अदालत के सदस्य की तरह, इसकी तो फ़ोटो लेनी चाहिए। मेरे हाथ में नोटबुक के नीचे फ़ोन रखा था। मैंने धीरे से निकाल कर गोद में रख कर तुरंत फ़ोटो खींच ली। जैसे ही मेरे फ़ोन की क्लिक आवाज़ आई, अचानक वो मेरी तरफ़ झपटी और ज़ोर से मेरी सीधी बाँह पकड़ कर ज़ोर से काट दिया। मैनें झटक कर अपनी बाँह हटाई तो दूर से एक और बंदरिया मेरी दूसरी बाँह पर झपटी। इतने में ही एक तीसरी मेरी पीठ पर झपटी। तीनों बंदरिया तीनों तरफ़ घेर कर खों खों कर मुझे डरा रहे थे। ये सब इतनी जल्दी हुआ की कोई भी महिला रियेक्ट नही कर पाई। पीछे दूर खड़े ड्राइवर भइया नजारा देखते ही आगे बढ़े। इतने में आसपास के लोग भी सक्रीय हो गए। उन्हें मार कर भगाया गया। बाद में मेरी बाँह की हालत देखी गई। मोटे कुर्ते की वजह से हल्की सी खुरच ही लगी है पर उसके ज़ोर से पकड़ने से नील हो गया है। बंदरिया आर्मी का ये आक्रमण बहुत रोमांचक था पर आगे के लिए बड़ी सीख है। मेरा चुपचाप बैठा रहने की वजह से शायद बाल बाल बच गई नही तो अस्पताल में होती।
असली फ़ील्ड वर्क यही है।
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