सिर्फ हम ही सामान्य है!

वो वंदना है। दो साल से अपने बेटे भावेश के साथ शांति सदन में रह रही है।

हमेशा औंधे मुँह पड़ी रहती है। खुद का ख़्याल और बेटे का। पिछली बार मिली थी तो तबियत ख़राब थी तो कमरे में ही उलटी कर रही थी। शाम को डॉक्टर को ले कर आए तो उसने खुद को दिखाया था। 

उसे सब से नफ़रत है। मैने कहा, वंदना तुमसे बात करनी है, तो लेटे लेटे बोली," क्या करोगी बात करके। पहले भी एक मैडम को सुनाई कहानी। चुपचाप सुन कर चली गई।"

मै चुपचाप उसके बेटे भावेश को अपनी कॉपी मे लिखना सिखा रही थी पर बार बार उसकी तरफ देख लेती। फिर अचानक क्या हुआ, वो उठी और पास कर बैठ गई। चिल्लाते हुए बिना साँस लिए वो अपनी कहानी बोलती चली गई।

"ऐसे करता कोई क्या साल की शादी के बाद! अपने बेटे को पहचानने से मना करता।"

"पूरे टाइम आँख मारता दूसरी रंडियों को। मेरे परिवार मे ऐसा नही होता। मेरे पिता के मरने के बाद उसकी गद्दी भी ले ली। छोड़ूँगी नही #%%^^ को।"

"सीज़र से भावेश हुआ तो पाँच दिन बाद इतना मारा की वापस हॉस्पिटल भरती होना पड़ा। इतना सहा, किसके लिए। मै कोई छोटे परिवार से नही हूँ। मेरा बाप जिंदा होता तो छोड़ता नही इसको।"

"मेरे परिवार ने मुझे इतना प्यार दिया। वो भावेश का बाप है तो क्यो भाग रहा है। कोर्ट में आता क्यो नही। क्यो भाग रहा &@₹&&"

"मैने बच्चे के लिए इतना किया, अब बोलता बेटे को मेरे से छीन लेगा। मुझे डायवोर्स नही लेना। प्यार करके कोई ऐसे कैसे कर सकता। उसको मेरे को और भावेश को हक़ देना होगा। दूसरी औरत नही रख सकता वो। कोई करता ऐसे क्या। हमारे समाज में ऐसा नही होता। हम ग्रंथी लोग है। सब विद्वान लोग है हमारे परिवार में।"

"सरकार की मदद से मै अपना हक़ ले कर रहूँगी। मुझे और कुछ नही करना बस मेरा हक़ चाहिए।"

वो बार बार बोले जा रही थी। मुझे बाकी लड़कियाँ बोल रही थी की ये पूरे समय बकती है। रात भर सोती नही है। आप उससे कुछ मत पूछो। बाकि स्टूडेंट भी वॉट्सएप पर मैसेज भेज रही थी की मैं उसको हिस्टारिकल बनने दूँ और दूर हो जाऊँ। 

"Amita everybody is saying That vandana becomes hysterical when she talks about her past. So distract her in between."

मैने तो सिवाय सुनने के कुछ नही किया। जब वो बहुत ज्यादा ग़ुस्से में थी तो उसके बेटे को बोला, "भावेश मम्मी को बोला चुप हो जाओ।"

भावेश मेरे पास बैठा टुकटुक कभी मुझे देख रहा था कभी अपनी मम्मी को। मै कभी कभार वंदना के हाथ को सहला दे रही थी। अचानक वो फूट फूट कर रोने लगी। मेरे गोदी मे सर रख कर उसने अपने अंदर का सारा ग़ुबार निकाल दिया। तब तक सब लंच कर चुके थे तो मैने उससे कहा की बाकी की बातें कल करेंगे।

मै निकल कर अपने रूम तक पहुँची तो बुरी तरफ रोना निकल गया। वो सब गालियाँ और बातें जो शायद मै भी किसी को सुना नही पाई थी वो सुनने को मिल गई! बहुत ही हल्का लग रहा है। जैसे मेरा खुद का भी बचा हुआ ग़ुबार निकल गया हो!

Today I am happy that Vandana is showing very clear positive signs. Her son Bhavesh stayed mostly with his mom. 

Today morning when I met her she was sitting and playing with her son, immediately got up and stood by my side. I asked her how is she feeling and told me with glee, "ठीक हूँ सुबह से भावेश के साथ खेल रही हूँ।"

I smiled and told her that he is one reason she should stop complaining about life and look forward in life. 

Then the girls watched a movie together and she was clearly enjoying it. In the evening when I went to give a sachet to Medicre, she understood the procedure and said, "बाल साफ होंगे तो दिमाग़ भी ठंडा रहेगा।"

फिर पंद्रह अगस्त गया था। कबीर का स्कूल में प्रोग्राम था तो वहा जाते हुए, होम पहुचते ११:३० बज गये। प्लान के हिसाब से पहले कुछ ग्रुप गेम खेले। आँख बंद कर बिंदी लगाना, बकैट में बॉल डालना। सभी लडकियों ने जम कर खेला। वंदना ने भी। भावेश ने भी।

फिर मैने एक ड्रॉइंग पेंटिंग इवेंट रखा था। पेपर बाँटे तो वंदना ने तीन माँगे दो बिस्तर के नीचे दबा दिये और बाकी सब के साथ बैठ कर करने लगी। एक झंडा बनाया, थोड़ी देर बाद देखा तो एक मर्द का चेहरा बनाया। मैने पूछा कौन है तो कुछ नही बोली, ब्लैक क्रेयोन ले कर पूरा चेहरा काट दिया। मै चुपचाप उसकी हरकत देख रही थी। मै दूर हट गयी। उसने फिर पेपर का वो हिस्सा फाड़ा उसे मोड़ कर फेंक दिया और बाकी का मुझे दे कर दूसरा माँगने लगी। मैने याद दिलाया की उसने खुद छिपाए है। वो निकाल कर फिर बनाने लगी पर अब कोई मर्द नही था।

लंच के बाद हम जाने लगे तो मुझे कोने में ले जा कर पूछी ये आपका बेटा है

मैने कहा हाँ और इसका बाप इसे चार साल छोड़ गया। मुड़ कर कभी नही देखा। 

उसमें जैसे अचानक जान गई हो। और कोने में मुझे घसीटते हुए बोली, "मुझे आपकी कहानी जाननी है।"

इस के बाद एक दिन सिर्फ १५ मिनट मुलाक़ात हुई। मै हॉस्पिटल के काम में लगी हुई थी। उस दिन एक प्यारा सा लेंहगा पहना हुआ था। बोली बहन दे गई है। पर फिर वो याद करने लगी जो शायद बहन कह गई है। पर बार बार मुझसे पूछने लगी, "आप बोलो दीदी में येडी हूँ क्या!" मैने नासिक में बीए किया है। पिताजी के साथ सारे ग्रंथ पढ़े है। मुझे येडी बोलता।

मेरे पास समय नही था तो मै आधा घंटा उसे सुन पाई। पर होम में नई आई बंगालन जो कुछ देर पहले अंग्रेज़ी में रोब ज़माने के लिए डाँटी जा चुकी थी। बग़ल में बैठी मेरी और वंदना की बातें सुन रही थी। शायद मेरा टेस्ट कर रही थी। 

वंदना का फ़ीडबैक अच्छा मिल रहा है। अभी बहुत समय है मेरे पास उस के साथ काम करने के लिए। सबसे बड़ी बात वो मुझसे नफ़रत नही करती और भावेश वो जो मुझे हर बार घसीट कर अपनी मम्मी के पास मे जाता है, और उसकी बिना शब्दों की मुस्कुराहट, मेरे केस वर्क का यही रिवार्ड है!

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