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खाने में ज़हर

बहुत लोगों को लगता है औद्योगिकरण हो कृषि का , लोग किसानी से बाहर आए और मशीनें अनाज बोए , चावल तैयार करे , आटा बनाए , तेल बनाए ! हाँ बिलकुल हो रहा है - सफ़ेद चावल , रिफाइंड आटा तेल अब आ तो रहा है। सब्ज़ी फल भी आ रहे है पैकेजड। हरित क्रांति आई। कैमिकल खाद , हानिकारक कीटनाशक और अत्याधिक खेती से ज़मीन से उर्वरकों खो दी , नई बीमारी दी और प्लेट में खाने की जगह हम ज़हर परोसने लगे ! पर जब ' ऑर्गेनिक होल वीट स्टोन क्रशड ' आटा , ' हैंड पाउंडेड ओर्गेनिक ' चावल , ' कोल्ड प्रेस्ड ओर्गेनिक ' तेल , ' ओर्गेनिक ब्राउन शुगर ' की बात होती है तो लगता है ये भारी भारी अंग्रेज़ी के जगह सिर्फ कह दो ' हरित क्रांति रहित ' आटा , चावल , तेल , शक्कर तो ठीक होता ! ये आज भी किसान अपने घर के लायक कर लेते है पर सब ख़त्म हो रहा है। आज इंसान समझ पा रहा है कि खाना और खाने की साम्रगी हाथ से ही सबसे बेहतर बनती है। मशीनें लालच को जन्म देती है औ...

समाजिक कार्यकर्ता क्या न करे!

वो बातें जो किसी भी महिलाओं के साथ काम करने वाले समाजिक कार्यकर्ता के लिए निषेद है क्योंकि के अपने में उनमें बची हुई पितृसत्ता की सूचक है ! महिला ही महिला की दुश्मन है। ये गंदी औरत है। इस औरत ने ग़लती की होगी तभी इसके पति ने इसे पीटा है। लड़कियाँ ही लड़कों से गलत हरकत करवाती है। ये सही होगी तो लड़कों की हिम्मत नही होती ! शादी से पहले या बाद में पुरुषों से दोस्ती गलत है ! औरतों को सम्मान तभी मिलता है जब वो सम्मानजनक काम करती है। घर में काम करने वाली का क्या सम्मान ! औरतें के बस में नही है की वो सुरक्षा कर पाए। ये तो पुरुष ही कर सकते है। भारी और मुश्किल काम औरतें नही कर सकती ! अनपढ़ औरत है ये तो पढ़े लिखों के सामने चुप रहे तो बेहतर है। औरतें बुज़ुर्गों के सामने बैठेगी तो उनका कोई सम्मान नही बचेगा। उसके तो ढेरों बॉयफ़्रेंड है बदचलन औरत है !

धर्म और औरत

सबरीमाला की तरह पूरे देश में ढेरों ऐसी जगह है जहा महिलाओं का जाना मना है और इसे रोकने के लिए अजूबों ग़रीब किंवदंती है। चलिए दो मैं सुनाती हूँ जानकार और जोड़ सकते है।   कन्नौज में मक्का मदीना के नाम की एक मज़ार है वहाँ औरतें नही जा सकती। कहानी है कि एक महिला पुरुष के वेष में वहाँ घुसने की मंशा से निकली तो वो मजार के सीढ़ी पर पैर रखते ही पत्थर की बन गई। ये कब हुआ किसी को नही पता। दूसरा कहा जाता है कि कोई पक्षी अगर ऊपर से गुज़रे तो वो मर जाता है।   सहारनपुर में एक फ़िरोज़ाबाद पीर बाबा की मजार है। कहा जाता है कि वो ज़मीन से १० फ़िट ऊपर था। पहले महिलाएँ ऊपर जा कर मजार के अंदर जा सकती थी। पर एक बार एक ' गलत ' महिला अंदर जाने लगी। उसके हर क़दम से मजार धँसती गई और आज १० फ़िट ज़मीन के नीचे है। तब से महिलाओं का जाना बंद है। ये कब हुआ इसका कोई पता नही है।

सूत्र समाजिक संस्थान के साथ

पहला दिन ! मुंबई से चले तो सभी समय से बांद्रा स्टेशन पहुँच गए थे। हम दस लड़कियाँ सूत्र , सोलन के   लिए। ट्रेन जैसे ही चली हमने पाया की हममें से एक हर्षिता ठीक १२ बजे ही पानी लेने के लिए उतरी थी। सभी डर गए पर फिर उससे बात हुई तो तसल्ली हुई की वो लेडिस गेनरल डब्बे में चढ़ गई थी। खैर सब सेटल हुए फिर लंच का समय हो गया। मम्मी ने बैगन की सब्ज़ी और पाँच पराँठे बनाए थे। ऐश्वर्या की रूममेट ने पूरी और आलू पैक कर दिए थे। तीन रेलवे की बिरयानी के साथ सबका लंच हुआ। रात के खाने के लिए रतलाम में नम्रता के घर से सबके लिए खाना आ गया। रोटी सब्ज़ी पुलाव। ऊपर से पेस्ट्री और हलुआ। अगले दिन के नाश्ते के लिए परमल ( मुरमरे ) प्याज़ टमाटर हरी मिर्च मँगवा लिए थे। सुबह खूब बढ़िया भेलपूरी बनाई। फिर रात के हलुआ के साथ खाया। दिल्ली आया तो मोनिका और हर्षिता के घर से ढेर सारा खाना अगले दिन सुबह तक। बेसन के लड्डू , अनारदाना .. पूरा रास्ता घर का खा...