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ये कैसा महिला आयोग

आज हम गए तो महिला आयोग के बदलते तेवर देखने  पर वहा तो जय सिया राम और भारत माता की जय सुन कर आ गए बोलना हमसे हो नही पाएगा, चाहे जो कुछ भी समझे! पर कानों को बंद नही पाए, वो सुन आए जो विनाश काल के संकेत साथ लाए है! हम एक परिवार है, जिन्हें परिवारों को टूटने से बचाना है! हमारी महान संस्कृति नमक की तरह नसों में घुल जानी चाहिए शादी करवाने का ठेका समाज से सरकार को चला गया  जल्द मदरसों में संस्कृत पढ़ाई जाएगी, वो अपनी नही भुले, हम अपनी उनको याद दिलाएँगे लड़कियों को सुसंस्कृत बनाएँगे, कढ़ाई बुनाई और खाना पकाना सीखेगी  मीना मंच में अपनी शादी के लिए गिफ़्ट तैयार करेगी बाल दिवस पर सुंदर कांड पर डिबेट होगा बच्चे रोज़ श्लोक चौपाई सोरठा याद करके आएगें फिर उसकी उलटी कर संस्कृति का पताका फहराएँगे  आंगनवाड़ी में अनप्रासन पर कटोरी बँटेंगीं, जन्म दिवस बनेंगे  गोद भराई होगी, जितने हिंदू बच्चे होंगे उतना उत्सव का अनुदान तलाक़ दी गई मुसलमान औरत को बचाना है, उसकी घर वापसी करवानी है! ये कौन सी बयार है, जो हमें बोलने लायक ही नही छोड़ती है!!

औरत पर जुर्म के हज़ार रंग

मेरे चार महिने के गहन फिल्ड वर्क और आठ महिने की काउसलिंग के आधार पर जो देखा, सुना और महसूस किया, उस आधार पर कह सकती हूँ की औरत अभी जगी नही है और उनके साथ जुर्म बढ़ते जा रहे है। जन्म से पहले से ज़िंदा रहने से शुरु हुआ संघर्ष उसकी हत्या, आत्महत्या या बीमारी से मौत से भी नही ख़त्म होता। गर्भवती महिला को हॉस्पिटल न जाने देना, दवाई खा कर गर्भपात, किसी भी प्रकार के परिवार नियोजन का उपयोग न करना, लड़के के लिए आशा-डॉक्टर द्वारा सातवें महिने तक गर्भपात, छोटी सी रसौली होने पर डॉक्टर द्वारा बच्चेदानी निकलवाना। पिता द्वारा बच्चियों का लैंगिक शोषण, बच्चियों को माँ से ज़बरन दूर कर प्रधान द्वारा कही और भेज देना। बाल कल्याण समिति को बाइपास कर बच्चियों को स्थानीय ऐजेंसी को देना! स्कूलों में लडकी-लड़कों को अलग कर देना, अलग ग्राउंड, क्लास में रखना, बात करने पर धमकाना मारना पीटना, साथ-साथ में कोई भी गतिविधि नही करवाना! किशोरियों की पढ़ाई रोक देना, बाहर नही जाने देना, बाल मज़दूरी करवाना, ज़बरन बाल विवाह, प्रेम संबंध के बारे में पता चलने पर लडकी को धमकाना, मारना-पीटना; समलैंगिक किशोरियों को बाहर आने में...

भगोड़ी लड़कियाँ

बेटियाँ भागती है बाप के घर से बहुएँ भागती है ससुराल से पत्नियाँ भागती है पति के घर से बहुत सोचती रही की आख़िर बेटे दामाद और पति क्यों नहीं भागते? इसलिए कि घर उनके है! वो तो भागने को मजबूर करते है! घर जिसका होगा उसकी हुकूमत चलेगी इज़्ज़त के नाम पर बातें है बातों का क्या अलस मसला तो एक बांदी खो जाने का है बस वो बांदी जिसके नियम तय है लक्ष्मण रेखा तय है कुछ साल पहले एक सुबह माँ का कॉल आया था बोली, लोग कह रहे है तुम बच्चों को छोड़ किसी के साथ भाग गई! मैं मुस्कुराई, कबीर दही पराँठे खा कर अभी अपनी खिलौने वाली कार मुझ पर दौड़ा रहे थे! माँ को बोली, माँ बच्चों को छोड़ भागेगी तो प्रलय आ जाए, कबीर के भगोड़े बाप की कोई बात नहीं करता! माँ बोली, मैं जानती थी तू ऐसा कभी नहीं करेगी। तेरा तो अपना घर है! फिर उस दिन सविता की सहेली का कॉल था  बोली, मैम सविता भाग गई किसी लड़के के साथ बाप ने किडनैपिंग का केस कर दिया है मैं मुस्कुराई, हाँ भागी तो है पर अकेली बेटी है  बाप को लगता है संपत्ति किसे देगा। दो चार होती या भाई होता तो मार दी गई होती! वो बोली, हाँ पर सविता ऐसी नहीं थी पता न...