मुर्दा लाश


"सुनिए हमारी बात आप कितना भी समझा दो कुछ नही होगा हम पहले से समझे है। हमें नही आगे बढ़ना। सीढ़ी नीचे उतरना आसान होता है ऊपर चढ़ने में ज़ोर लगे है। हमें तो नीचे रहने में फ़ायदा है।लड़कियों को स्कूल भेजो तो स्कूल से ही भाग जाती है। बडी होने पर लड़की को घर के बाहर भेज कर लड़कों को नही बिगाड़ना। लड़की जब तक हाथ से नही छुए कोई लड़के कुछ नही करते। लड़कियाँ रंजिश की भी शिकार होती है। किसी से कोई मतलब नही रखो। घर में रोज़गार कर लो बच्चे खा पीले काफ़ी है।दीन की तालीम कराके कर देनी चाहिए शादी। मर्द जो चाहे करे! जो पढ़ाते है लड़कियाँ वो बड़े लोग है उनकी लड़कियों को भगाने की हिम्मत नही। 

ऐसा है हमें कैसी भी जानकारी नही चाहिए - न शिक्षा की न स्वास्थ्य की न पंचायत की न क़ानून की। सब मर्दों को पता होनी चाहिये हम तो वो जो कहेंगे वही करेंगे। हाँ घर में ठेले बैठे कुछ सिलाई करना या फूल बनाने का काम दिला दो, सौ रुपए दिन के मिले बहुत है। हमें क्या बिचौलियों तीन सौ कमा रहा या चार सौ। बेचारा गाँव से ले जा रहा तेल फूँक रहा, ये सब किसी औरत के बस का नही!

हम समय काट रहे आप भी काट लो, हम तो जैसे है वैसे ही रहेंगे!"

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