राजपूताना बंदूक़
आप बंदूक़ों की बात करते है
आप बंदूक़ों की गोलियों की बात करते है
वो भी तब जब आप न पुलिस में है और न आर्मी में
आपकी गोलियों से न आपके घर का चुल्हा जलता है
और न ही उनसे आपका कोई बच्चा स्कूल जाता है
पर हाँ आपके गोली से आप को जेल होती है
आप पर गुंडा एक्ट लगता है ३०७ का केस होता है
आप केस लड़ते हो
पैसे के लिए ज़मीन बेचते हो
आप परेशानी में शराब पीते हो
फिर आपकी बीवी किसी के खेत में मज़दूरी कर बच्चे पालती है
कोई ठान न होने के कारण आपको पता नही की आपका बूढ़ा बाप मर गया तो उसका क्रियाकर्म कैसे होगा
बेटा आठवीं के बाद स्कूल नही जा पाता
बेटी १६ की हुई की शादी कर देते हो एक पेट कम जो हो जाएगा
आपकी बंदूक़ है पर घर में रोटी नही है
बेरोज़गारी है।
लॉयर पुलिस वाला सब दूसरे है कोई आप की क्या सुनेगा क्या समझेगा
मीडिया आपकी व्यथा नही सुनाएगी, वो आपकी नही है!
न कॉन्ट्रैक्टर आपके है न बाज़ार, सब उसका है जिसके कहने पर आपने गोली चलाई थी!
बेटी बेटे को पढ़ाने के सपने चूर हो चुके है!
बेटे को देने के लिए आपके पास क्या बचा सिवाय आपके बंदूक़ के...
और चक्र चलता रहेगा...
आपको इल्म भी नही की एक बंदूक़ ने आपके इंसान का जन्म व्यर्थ कर दिया
और चैन से मरने भी न दिया!
और गोली चलवाने वाला आप पर दया कर आपके मरने पर आपकी बीवी को १०१ रुपये पकड़ा जाता है!
आपका माई बाप जिसके उकसाने पर आपने नदीम भाई पर गोली चलाई थी
वो नदीम भाई जो आपका जाति भाई है
जिसके परिवार ने तीन पीढ़ी पहले इस्लाम क़बूला था!
आपके लिए जाति से बड़ा माई बाप हो गया
वो घुसपैठिया जो कुछ समय से आपको १०१ रुपये की मीठी गोली दे कर लूट रहा है
वो जो कभी आपके दरवाज़े पर चून की भीक्षा ले जाता था!
और आप लुट रहे हो!
लुटो क्योंकि आने वाली पीढ़ी कभी तो जागेगी और जानेगी
उस काले अध्याय को जब आपने अपने पूर्वजों को मुँह पर कालिख पोती थी
वो जिन्होंने न किसी ब्राह्मण को न ही किसी अंग्रेज़ को अपने जीवन में सेंध करने दी
आज आप उन्हें माई बाप बनाए बैठे हो!
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