उड़ता बचपन
फिल्ड वर्क में आप निकलते हो आपको पता नही होता आज क्या नया मिलने वाला है। चाहे आपका पूरा फ़ोकस आपके टॉपिक पर हो पर जो सामने हो रहा हो उसपर आँखें बंद भी तो नही कर सकते।
मैं एक प्रतिवादी से मिल कर दूसरे से मिलने पैदल जा रही थी। स्थान नॉयडा सेक्टर ३४ के धवलगिरि एपार्टमेंट के सामने। देखा तीन बच्चे तेज़ी से एक डब्बी से लिक्विड निकाल कर पैकेट में डाल रहे थे और एक तीसरा उन्हें ये करता देख रहा था। उम्र कबीर की, ८-१० साल मुश्किल से! मैने पूछा किया कर रहे हो तो वो तुरंत डब्बा फेंक कर भाग गए। जो देख रहा था उससे पूछा तो वो बताने लगा।
"नशा करते है। ४० रुपये का मिलता है!"
"माँ बाप को नही पता चलता?"
"बताते थोड़े है!"
"क्यों करते है?"
"मज़ा आता है!!"
बच्चे ठीक ठीक कपड़े पहने थे और मोरना की तरफ भागे! मोरना में ज्यादातर छोटे व्यवसाय वाले रहते है। ज्यादातर मुस्लमान और दलित परिवार है! क्या है जो इन शहरी इलाक़े के बच्चों को नशे में ढकेलता है!
थोड़ा आगे चली तो नाले के दोनो तरफ झुग्गियाँ जलाई जा रही थी और साथ-साथ दमकल आग बुझा रही थी!
"इसमें रहने वाले कहा गये होगे?" मैने पूछा!
"क्या पता! अभी तो आगे बहुत बाकी है जलाने को!" किसी राहगीर ने जवाब दिया!
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