कामुकता की ताकत


दे दनादन दलित महिलाओं के लोक गीत सुने जा रहे है। बामन का छोरा, जाट का छोरा, हरिजन के छोरे, बनिया, बंगाली, जीजा, बहनोई, दरोग़ा, राजपूत हर किसी के साथ ज़बरदस्ती और मन से दोनों तरह के सम्बंधों पर गीत है! 
यौन सुचिता सिर्फ ढकोसला है! हर समाज में पुरुष महिलाएँ दोनों आज़ाद रहे है। सिर्फ जरूरत के अनुसार जो चाहते है वो बताया जाता है। दलित संस्कृति, गीतों, स्वाँग पर दलित लेखक/ लेखिका के विचार पढ़ने को नही मिलते पर मुझे लगता है बहुत कुछ है जो लिखना ज़रूरी है।

"रसौली के ऑपरेशन के बाद मेरे चेहरे पर झाइया आई है नही तो बहुत सुंदर थी मैं। मेरी बेटी बहुत प्यारी है। उसकी तो मैडम भी कहती है इतनी गोरी है और सुंदर चेहरा है किसी भी तरह से चमार नही लगती। ख़ुद को जाट भी बोलेगी तो कोई शक नही करेगा!"

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