गाँव - एक समाजिक कार्यकर्ता की नज़र से
1. तलहेडी इंटर कॉलेज में त्यागियों (मुस्लमान) का लौंडा छेत्त दिया दिखे चमारों के लौंडों ने। साखन की किसी मुस्लिम लड़की को ले कर लठ्ठ चल गए। कल चमार के एक लड़के को लड़की के भाई ने छेत्त दिया।
2. कल एक बुज़ुर्ग महिला मर गई। आज गाँव ले कर आए है। यहा मायका था। द्ययोती (बेटी के बेटी) के रहती थी। वही मर गई। चार लड़के थे वो रखते नही थे। अपने भाभी के घर रही कुछ दिन, चाची के घर भी न रह पाई। कोई न रखता था बेचारी को! भाई भतीजे सब आ गए, वैसे रोटी का टुकड़ा कोई न देता था।
3. जोगियों की १३ साल की लड़की थी और पड़ोस का १८-१९ साल का गुज़र का लड़का। लड़की बिना कपड़े के रोती चिल्लाती पाई गई। जोगिनों ने चार लाख माँगे केस न करने के। गुज़र दे नही पाए तो लड़का पकड़ा दिया!
4. पड़ोस में एक चमारों का लड़का था, बहुत पीता खाता था और लौड़ियों में जाता था, औरत के तीन भाई आए राखी पर इतना छेत्ता की पूरा शरीर नीला पड़ गया। फिर भाई बहन को ले कर चले गए, वो रोकता रह गया। पीछे लड़के ने दवाई (ज़हर) खा लिया और मर गया। अब वो वापस आ गई है तीन बच्चों के साथ रह रही है। अभी भाई ख़र्चा उठा रहे है आगे का पता नही क्या होगा।
5. गाँव की अभी की प्रधान मीना खातून अनपढ़ है, लड़का करता है प्रधानी। मैं भी लड़ी थी चुनाव, आठवीं पढ़ी हूँ दुकान चला रही हूँ। पति ब्लॉक ऑफ़िस में है। ये गाँव के छोटे प्रधान है। ख़ूब चलती है इनकी। पहले प्रधान की इज़्ज़त होती थी अब प्रधान का डर होता है। अब पैसा का खेल है। पहले सामाजिक होते थे अब तो दबंग होते है बस। महिलाएँ तो नाम भर के लिए है!
(एक गाँव में तीन-चार घंटे में इतना कुछ देखने सुनने को मिल जाता है)
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