गुलामगिरी

आज एक महिला की बात ने दिमाग का दही बना रखा हैं. जिस तरह से कहते कहते वो रोने लगी, याद कर के सिहरन सी हो रही हैं... 
"दीदी ऐसी ऐसी जगह छड़ी से, कोहनी से, घुसे से मारता था कि किसी को दिखा भी नहीं सकती थी. रांड (विधवा) जिठानी के नाल लगा रहता था, वो देखने में अच्छी थी. मैं कुछ कहती तो पिट जाती. ६ साल में बिलकुल पागल हो गयी थी. फिर उसका एक्सीडेंट हो गया तो उसकी कंपनी से नौकरी छुट गयी. मैंने देखभाल की तो सुधरा. अब ४ बच्चे हो गए पर, अब भी गुस्से में पीट डालता हैं!!"
जंगल मे बकरी या हिरण, कितने भी छोटे क्यो न हो, शेर के हलके से आभास से चौंकन्ने हो जाते है। फिर दौड़ लगा कर किसी सुरक्षित जगह चले जाते है।
इंसानों मे बकरी और हिरण स्वभाव के अक्सर शेरों के पास स्वेच्छा से चले जाते है। शेर नोंच नोंच कर खाने भी लगे तो भी वही बने रहते है क्योकि शेर का पास होना उनमें सुरक्षा का भ्रम बनाए रखता है!

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