शक का दीमक

"मैंने तो बहन के देवर के दिल की बात की। अगर मैने कोई गलत बात कही हो तो मुझे ज़िंदा गाड़ दे। अगर ये सब देखना था तो घर बैठी ठीक थी, दो जाकत के धेजू के साथ क्यों गई। मैने क़सम खा रखी की जब तक ख़ुशी से नही ले जाता मैं रोटी नही खाने की। पहली रस्सी डाल के मर गई, मैं भी इकर मर जाऊँगी। माँ बोली हम भी नही करने बात जी कर तू रिकॉर्डिंग करे। फिर भी नही माना।" 
ये आज का तीसरा केस है जहा शक की बीमारी ने रिश्तों में खाई बना रखी है। कारण मोबाइल पर किसी से मन की बात करना। पुरुष औरत को अपनी निजी सम्पति समझना कब बंद करेगा!

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