लिंगभाव

किशोर लड़कियाँ लड़कों के मुक़ाबले लिंगभाव स्वत: ही समझती है! वो समझती है की उनके साथ भेदभाव हो रहा है पर ख़ुदसे कुछ बदलने में असमर्थ पाती है। लड़के १०-१२ साल के होने तक पावर चख लेते है इसलिए वो हर लिंगभेद को सही क़रार देते है। लडकियों को उनके हक समझाने आसान है, पर हक माँग कर नही लड़कों से छीन कर मिलेगा ये अगर सही से नही समझाया गया तो लड़कों में स्त्रीद्वेश और लडकियों में हताशा हो जन्म दे सकता है!

(पहला लिंगभाव का वर्कशॉप)

उदाहरण के तौर पर दो बातें लडकियों लड़कों से अलग अलग पूछिए और अंतर देखिए लड़कों लडकियों का!

  1. छोटी लड़कियाँ गुड़िया से खेलना ज्यादा पसंद करती है। (सही/गलत)
  2. वो अकसर रोता है ये लड़कों जैसी हरकत नही है। (सही/गलत)
लड़की तो कुरडी का कबाड़ है!

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