बीमारी की लत

"बोब्बो गोली दे दे!"
"किस बात की?"
"तबियत ठीक नही लग रही!"
"क्या हुआ?"
"बुखार की दे दे!"
"पर आपको बुखार तो नही है!" (चेक करते हुए)
"दे दे न ठीक हो जाऊँगी।"
"ठीक है लो ये गोली खा लो।" (एक पैरासिटेमॉल देते हुए)
"ए बोब्बो कंजूसी मत कर, एक गोली से क्या होगा हमारा दो दे दे!"
"एक से ज्यादा नुक़सान करती है। एक से ही आराम हो जाएगा।"
अभी पेपर में फाइजर का एंटीबायोटिक के अनियंत्रित प्रयोग पर 'आओ मिलकर रोकें' का फ़ुल पेज एड पढ़ कर महिलाओं की रोज़ की दवाई की फ़रमाइश याद आ गई!
मैंने ये बेमतलब गोली खाने की बीमारी हर उस इंसान में देखी है जो परिवार में उपेक्षित है। ख़ास कर उपेक्षित महिलाएँ अपनी तरफ ध्यान आकर्षित करने के लिए ये अकसर करती है!

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